टीवी पेपर रोज बतामै, बढिगा पापाचार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।
मरिगै मन के मानवता अब, खुल्ला घूमै पापी।
जुल्म के जकडी जनता जानै, पुलिस करै गद्दाफी।
कोर्ट मा कढिलै कबसे देखा, केस के फोटो कापी।
राम के धरती रहि-रहि रोबै,देखिके आपाधापी।
या कुकरम अब कब-कब देखी , दिल्ली हय लाचार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, है कलयुग है शमशार।
समझ ना आबै अब, संकट मा मोचन कइसन होय।
चीर हरन के रखवाले, अब जागा कुछ होय।
देश धरम के परदा माही, फेर से रखी संजोय।
या कलंक के कालिक पोता, काल का देय निचोय।
प्रेस पुलिस अउ पव्लिक पूछै, का किहिस सरकार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, है कलयुग है शमशार।
गांव गली अउ शहर नगर मा, सब जन मिल के सोची।
अपने घर के लडिकउनेन का, गलत काम से काम से टोची।
फैशन फोक्कस है फोकट के,ओभर है अब खोची।
या समाज के संरक्षण मा, आपन मिड्डा रोची।
कहै उमेश या दुख का दिखके, दिल मा होय दरार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।
टीवी पेपर रोज बतामै, बढिगा पापाचार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।
मरिगै मन के मानवता अब, खुल्ला घूमै पापी।
जुल्म के जकडी जनता जानै, पुलिस करै गद्दाफी।
कोर्ट मा कढिलै कबसे देखा, केस के फोटो कापी।
राम के धरती रहि-रहि रोबै,देखिके आपाधापी।
या कुकरम अब कब-कब देखी , दिल्ली हय लाचार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, है कलयुग है शमशार।
समझ ना आबै अब, संकट मा मोचन कइसन होय।
चीर हरन के रखवाले, अब जागा कुछ होय।
देश धरम के परदा माही, फेर से रखी संजोय।
या कलंक के कालिक पोता, काल का देय निचोय।
प्रेस पुलिस अउ पव्लिक पूछै, का किहिस सरकार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, है कलयुग है शमशार।
गांव गली अउ शहर नगर मा, सब जन मिल के सोची।
अपने घर के लडिकउनेन का, गलत काम से काम से टोची।
फैशन फोक्कस है फोकट के,ओभर है अब खोची।
या समाज के संरक्षण मा, आपन मिड्डा रोची।
कहै उमेश या दुख का दिखके, दिल मा होय दरार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।
टीवी पेपर रोज बतामै, बढिगा पापाचार।
चला बचाई बहिनी बिटिया, कलयुग है शमशार।